Sunday, 3 August 2014

वो सुबह कभी तो आएगी!

वो सुबह कभी तो आएगी,
जब अखबारों की सुर्खियां,
वारदातों की खबर का शोर नहीं,
खुशियों के गीत सुनाएँगी,
जब लड़कियाँ घरो से बेख़ौफ़ निकल पाएँगी,
वो सुबह कभी तो आएगी,

जब सास-बहु के झगडे नहीं,
घर में प्यार की धुन गुनगुनाएगी,
और बहु के जलने/मरने की नहीं,
उसके उन्नति की खबरें आएँगी,
वो सुबह कभी तो आएगी,

जब घर से निकलती लड़की बेख़ौफ़ चल पाएगी,
जब वासना नहीं, इज़्ज़त की नजरें देख पाएँगी,
जब घर में बैठी उसकी माँ निश्चिंत घर पे रह पाएगी,
वो सुबह कभी तो आएगी,

जब लड़कियों के बलात्कार की घटनाएँ बंद हो जाएँगी,
जब लड़कियों को कोख में मारने की प्रथा बंद हो जाएगी,
जब वो भी ख़ुशी से हसेंगी, खेलेंगी और मुस्कराएँगी,
वो सुबह कभी तो आएगी,

जब नेताओ का मानसिक संतुलन सही हो पाएगा,
जब बयानों में राजनीति नहीं, जनता का दर्द आएगा,
जब उनकी सोच संकीर्ण नहीं, कुछ ब्रॉड हो जाएगी,
वो सुबह कभी तो आएगी,

जब आम इंसान को उसके हक़ मिल पाएंगे,
जब घोटालों की जगह पैसे का हक़ लोगो को मिल पाएंगे,
जब आम इंसान के सपने भी पूरे हो पाएंगे,
वो सुबह कभी तो आएगी,

-शुक्ल

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